attack on army officer: col pushpendra singh bath पर patiala india में हुए जानलेवा हमले से जुड़े कुछ ऐसे फैक्ट्स जिनका सामने आना बेहद जरुरी, पढ़िए कौन कौन से वो फैक्ट्स हैं

जालंधर(02/04/2025): आप सभी पाठकों को अब तक सोशल मीडिया और मेन स्ट्रीम मीडिया से ये खबर जितनी चाहिए मिली होगी की पंजाब के एक शहर पटियाला  में कुछ पुलिस मुलाजिमों ने सेना के एक कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके बेटे अंगद सिंह बाठ के साथ एक ढाबे के बहार जब पिता पुत्र खाना खा रहे थे तब बड़ी बेरहमी से मार पीट की, इसके बाद कर्नल बाठ के परिवार ने इस मामले में इन्साफ पाने के लिए संघर्ष शुरू किया जो अब तक जारी है बात पुलिस के सभी बड़े अधिकारियो से लेकर देश के रक्षा मंत्री और पंजाब के गवर्नर तक पहुंची पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इतने व्यस्त रहते है की परिवार से मिलने का समय उन्हें सबसे अंत में मिला और उन्होंने परिवार को पूर्ण इन्साफ देने का ऐसा वादा किया जो सबके दिल में उतर गया पर ये भरोसा सफ़ेद झूठ निकला, परिवार अभी इन्साफ के लिए सारे पहाड़ चढ़ने में लगा हुआ है पर इन्साफ किस पहाड़ की किस चोटी पर है किसी को दिख नहीं रहा, 

हम इस स्टोरी में इस मामले के कुछ ऐसे फैक्ट्स पे बात करेंगे जो कानूनी तौर पे तो बेहद जरुरी हैं ही पर  पूरे देश की जानता को जानने भी जरुरी है की आज देश में कानून के हाल कैसे हैं ख़ास कर पंजाब में कैसे कानून का पालन जिन लोगों ने दूसरों से करवाना है वो खुद ही वर्दी पहन कर कानून हाथ में ले रहे हैं और पंजाब सरकार इन लोगो को कैसे कानून की पकड़ से बचाने में लगी हुई है

कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ ने मामले में जो ऍफ़ आई आर दर्ज करवाई है उसमे लिखवाया है की जब पिता पुत्र ढाबे पे खाना खाने के लिए रुके थे तो अंगद बाठ ने अपने एक दोस्त जिसका नाम भी अंगद सिंह तलवार है को उस समय ढाबे पे खाना खाने के लिए बुलाया था इसी लड़के ने पूरे घटना कर्म की जानकारी फ़ोन करके कर्नल बाठ की पत्नी को दी थी पर समझ नहीं आता की इस लड़के का न तो कही कोई ब्यान दिखाई दिया है और न ही ये लड़का अब तक मीडिया के सामने आया है ऐसे में ये लड़का घटना का प्राइम विटनेस है मतलब इस लड़के की गवाही आगे चलकर अगर बदल गई तो कर्नल साहिब द्वारा दर्ज करवाई गई ऍफ़ आई आर कमजोर भी पड़ सकती है इस लिए इस लड़के की सही गवाही का सामने आना बेहद जरुरी है 

इस पूरे मामले में कर्नल बाठ के एक रिश्तेदार श्रीमान ढिल्लों परिवार के साथ मैदान में डटे हुए है बताया जा रहा है की श्रीमान ढिल्लों बीजेपी से जुड़े हुए है ऐसे में इस बात का शक भी पैदा होता है की कहीं बीजेपी इस मामले को तूल तो नहीं दे रही, ये बात कितनी सही है कहना मुश्किल है ये बात सच भी हो सकती है और एक भ्रम भी हो सकती है

यह मामला 13 और 14 मार्च 2025 के बीच की रात का है पर मामले में ऍफ़ आई आर पूरे 8 दिन बाद दर्ज की गई ऐसे में किसी एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी रहेगा की हमलावर पुलिस मुलाजिमों ने घटना के समय शराब या किसी अन्य नशे का सेवन किया था या नहीं ये कैसे पता चल सकेगा, कहीं इस बात को छुपाने के लिए ही तो ऍफ़ आई आर 8 दिन बाद दर्ज नहीं की गई ताकि बाद में अगर मेडिकल करवाया भी जायेगा तो इन पुलिस मुलाजिमों ने घटना के समय कोई नशा किया था या नहीं इस बात की ठीक से जानकारी न मिल सके 

मामले में ऍफ़ आई आर 22/03/2025 को दर्ज की गई है पर इसके बाद भी ढाबे पे लगे सी सी टीवी फुटेज को इन्वेस्टीगेशन अफसर ने कस्टडी में क्यों नहीं लिया, कहीं ऐसा तो नहीं की इस बात का इंतज़ार किया गया हो ताकि सी सी टीवी फुटेज से छेड़ छाड़ की जासके 

घटना के बाद हमलावर पुलिस वालों ने कर्नल साहिब का मोबाइल फ़ोन उनसे छीन लिया था ऐसे में कोई बड़ी बात नहीं की कर्नल साहिब के मोबाइल में कुछ ऐसी चीज़ें हो जो देश की सुरक्षा के लिए जरुरी हों और इन हमलावर पुलिस वालों के हाथ लग गई हो ऐसे में इन सभी पुलिस वालों का पूरा इतिहास खंगालना जरुरी होना चाहिए की कहीं इन लोगो का किसी देश विरोधी तत्व से कोई सम्बन्ध तो नहीं है, इस बात को इल्जाम के तौर पे नहीं लिया जाना चाहिए बस देश सुरक्षा कारणों से जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए 

आपको ये जान लेना चाहिए की इस मामले के तुरंत बाद एक ऍफ़ आई आर उक्त ढाबा के मालिक के ब्यान पर दर्ज की गई थी जिसमे कर्नल साहिब और उनके पुत्र को आरोपी बनाया गया बताया जा रहा है, इस बात की भी जांच होनी चाहिए की ढाबा मालिक का इस मामले में लोकस स्टैण्डई क्या है या ऐसे कहे की ढाबा मालिक एक थर्ड पार्टी है उसके ब्यान पे मामला दर्ज करने का क्या मतलब है 

इस घटना के बाद एक पुलिस कांस्टेबल ने अपने ही ठाणे में जाके शिकायत की थी की कर्नल साहिब और उनके पुत्र अंगद ने इस कांस्टेबल को चोट पहुंचाई है कई मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है की हमलावर पुलिस मुलाजिम घटना के समय सिविल वर्दी में थे ऐसे में अगर ये बात सही है की कांस्टेबल ने शिकायत दर्ज करवाई है की कर्नल साहिब और उनके पुत्र अंगद ने उसकी वर्दी फाड़ी है तो जब सभी सिविल वर्दी में थे तो अकेले कांस्टेबल की वर्दी कैसे फट गई और जो चोटें लगी होने की शिकायत ये कांस्टेबल कर रहा है की भी ढंग से जांच होनी चाहिए 

वहीँ दूसरी तरफ कर्नल साहिब और उनके पुत्र अंगद दोनों का मेडिकल टेस्ट राजिंद्र हॉस्पिटल में घटना वाली रात को ही करवा लिया गया था जिसमे सामने आया है की कर्नल साहिब और उनके पुत्र अंगद बाठ दोनों ने घटना के समय शराब नहीं पी हुई थी तो ऐसे में यह बात कौन फैला रहा है की घटना के समय कर्नल साहिब और उनका पुत्र अंगद बाठ दोनों अपनी हौंडा कार की डिक्की पे रख कर शराब पी रहे रहे थे इस बात की भी जांच होनी जरुरी है 

इन्साफ पाने के लिए जब कर्नल बाठ पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचे और जब अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो पता लगा की कर्नल साहिब के सामने पंजाब सरकार ने पुलिस विभाग का पक्ष रखने के लिए 8 वकील खड़े किये हुए हैं जिनमेंसे एक प्राइवेट सीनियर अधिवक्ता भी हैं ऐसे में भगवंत मान से पुछा जाना चाहिए की अगर वो पीड़ित कर्नल परिवार को इन्साफ देने की नियत रखते थे तो इतना महंगा प्राइवेट सीनियर वकील पुलिस विभाग का पक्ष रखने के लिए क्यों बुलाया गया है

इस मामले में कांस्टेबल साहिब ने भी एक प्राइवेट सीनियर अधिवक्ता हो अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था जो पहले कभी पंजाब सरकार के प्रमुख वकील हुआ करते थे ऐसे में शक पैदा होता है की कहीं पंजाब सरकार ने ही तो इस कांस्टेबल के लिए इस सीनियर अधिवक्ता को बुलाया न हो, इसके इलावा सवाल खड़ा होता है की कांस्टेबल जी को क्या सच में पता था की सीनियर अधिवक्ता का अदालत में क्या लेवल होता है और सीनियर अधिवक्ता के क्या फायदे होते हैं अगर कांस्टेबल साहिब इन सब बातों का ज्ञान पहले से रखते थे तो उनको कांस्टेबल नहीं कोई बड़ा अधिकारी होना चाहिए क्योकि ये सब बातें कई बार तो बहुत पढ़े लिखे और अनुभवी लोगो को भी नहीं पता होती, इस बात की भी जांच होनी चाहिए की कांस्टेबल साहिब ने सीनियर अधिवक्ता की भारी भरकम फीस कैसे अदा की होगी 

पंजाब सरकार ने एक तरफ तो अदालत से कहा है की विभाग ने सभी आरोपित इंस्पेक्टर्स को ससपेंड कर दिया है वही दूसरी तरफ कहा की सी सी टीवी फुटेज में किसी का चेहरा साफ़ दिखाई नहीं दे रहा है तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की अगर विभाग को ये पक्का पता ही नहीं है की हमलावर कौन थे तो किस आधार और सबूत की वजह से 4 इंस्पेक्टर्स को ससपेंड कर दिया गया है 

एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है की इस मामले में जो इन्वेस्टीगेशन अफसर नियुक्त किये गए हैं, ऍफ़ आई आर दर्ज किये जाने से पहले ये जनाब घटना वाली जगह और राजेंद्र हॉस्पिटल 15/03/2025, 17/03/2025 और 21/03/2025 को क्या लेने जाते रहे हैं जब की कर्नल साहिब और उनके पुत्र अंगद बाठ का बयान 14/03/2025 की रात को ही दर्ज कर लिया गया था    

 पंजाब सरकार के वकीलों ने अदालत को बताया है की 18/03/2025 से 20/03/2025 तक पटियाला पुलिस खनौरी बॉर्डर और शम्भू बॉर्डर पर किसानों के धरने हटवाने में व्यस्त थी ऐसे में अदालत ने पंजाब सरकार से पुछा है की इन दिनों में जो भी अन्य ऍफ़ आई आर पटियाला में दर्ज की गई है सबकी डिटेल्स अगली तरीक पर अदालत में पेश करो मतलब अदालत जाना चाहती है की अगर उन दिनों में अन्य मामलों में अन्य लोगो की ऍफ़ आई आर दर्ज हुई है तो इस मामले में समय पे ऍफ़ आई आर दर्ज क्यों नहीं की गई

पुलिस विभाग इस बात पे जोर दे रहा है की उन्होंने 4 इंस्पेक्टर्स को ससपेंड कर दिया है अब ये बात समझ नहीं आती की ससपेंड करना तो विभाग की अंदरूनी कार्रवाई है पर कर्नल साहिब द्वारा की गई क्रिमिनल कंप्लेंट पे क्या कार्रवाई की गई इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आरही है ऐसा क्यों हो रहा है

इस मामले अगली तारिख 03/04/2025 को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में अर्जेंट लिस्ट में लगी हुई है ऐसा लगता है इस तरीख या अगली तरीख तक अदालत मामले की जांच सी बी आई को देदे तो कोई चौकाने वाली बात नहीं होगी, बाकी देखना है की अदालत का अगला कदम क्या रहता है 



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